मैं वतन से दूर सही




वतन को कौन भूलता है, माटी तो रग रग मैं है
सोता हूँ तो रूह भटकती है की मुझे मेरा वतन जाना है

माँ कहती है खुश रह बेटा, जहाँ भी है,
पर तुझे देखने को जी चाहता है।
खाता है न तू आछे से
की रोटी बनाती हूँ तो तेरा याद आता है ।

बाबा और पापा की आंखों मैं,
वोह आंखों पर रुकी रुकी आंसों याद है।
क्यों लोग रोते है,
एक दूसरे से बीछरने के बाद।

बेहेन पूछती है फ़ोन पे
"दादा राखी मिली की नही
आओगे तो पार्टी लूंगी
कई बचे हैं लेने के लिए।

टटोलता हूँ दिल को तो, एक आवाज़ सी आती है
चला गया दूर, सपनू के लिए आपनो को छोरकर।
घर की वोह एक कुर्सी खाली है
जिसपर तू बैठ पढ़ा करता था
तेरी वोह केरोसिन वाली लैंप रखी है
खिरकी के किनारे साफ़ करके

न!
मत पूछ इस दिल से, घर को कब याद करता हूँ,
वतन से दूर सही,
यादें हैं, उनसे बातें करता हूँ।















1 टिप्पणी:

  1. yaado se bate karte rahenge to nai yaade kab banayenge
    yakken mane nayi yaado ko purani yaado ke saath mix kar ke gungunayenge to life ke sare flavor ek saath me payenge ;)

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