ek saach

soch utt jata magnn mann main kabhi kabhi,
nashwar dhraa per, liye nashwar sarir, kron kaunsa karmm main?
aaye gaye kye karmyogi iss jaag main
Rha kaun sada zinda iss jaag main ?

dil jodna, dil tootna, aurr dil ke anek krirapan,
ya ho mann, buddhi, gyaan, soch, samarpan,
saab ko jhootlata, jeevan ka ek matrr sacch,
woh aant rahasmey bindu, sarir ka mrityu-daand.

kya soch sarir uss waqt rukk jata hai,
dharakti hai baakiyon ka hridya,
ankhon per aanson laker,kai mukhron perr,
aapna dil kyon dharakna bhool jata hai ?

yh sarir naast hoker, maati, jaal, hwaa baan jaeyga,
naast tatwon liye ek  perr socha-fal, patte,jaar banonga,
khaaya ger koi woh fal, patte; uss perr se,
main ek naast tat-va,nye rup main, ussmay samahit ho jaonga.

main to taab kaal bhi tha, aaj bhi hun,
kaal bhi rahonga, Krishn ki vaani yaad aati hai;
haan per na hoga yh mann, yh hridya,per nye roop main,
iss shriti main, khud ko anekon main bhiker jaonga.

पतंग

पतंग उडाये आसमान में, सोच धागा  ले काटूँगा
जब आई वार पतंगों की तो, अपना ही बंधा टूट गया |

टूट गिरी  धागा निहत्ते, वोह मेरा पथ-वीर बिछर गया,
कसम ली थी साथ उड़ने की तो, मुझसे तू क्यों रूठ गया |

वोह पतंग मेरा जा रहा, न जाने किसके हाथ वोह आएगा,
बंधा था मेरी खुशियों के डोर से,अब उसे कोई और उडाएगा |

नजर उठाकर देखा आसमान में, हर तरह के पतंग वहाँ ,
कोई कटता तो कोई काट रहा, हर डोर एक संघर्ष वहाँ |

एक पतंग कट कर आया, हम जहाँ खड़े थे वहीँ,
सोचा छुपा उसे रख लूँगा, पर न उड़ना उसका कर्म नही |

नए शिरे से फिर से बाँधा, दिया हवा में उसको जोश,
धागा ले मस्त हो उड़ा, लहराता,बलखाता, खुद में मदहोश |


होली

कोई खेले रंग की होली,
कोई खेलता खून की |
कहीं गोली तो कहीं योग है,
कहानी मेरे मात्रिभूम की ||

होलिका दहन तो चलती आई,
होली के सन्देश में |
भ्रस्टाचार को क़ब दहन करोगे,
बताओ भारत देश में ||

कोई फेहला रहा भारतीय रंग,
जाकर दूर प्रदेश में |
कोई थाली छलनी छेद कर रहा,
रहकर प्यारे देश में ||

कोई काली मिट्टी पोत रहा है,
लेकर लालची लटकती  लम्बी  जीभ |
कहीं उड़ा रहे, सतरंगी गुलाल हवा में,
खुशियाँ बिखेरते कर्मठ भारतीय वीर ||

भाँग जोश का बदन में चढ़ाव,
रंगों दुनिया को 'इंडियन' के रंग में |
है लगा धब्बा, मलमल उससे हटाओ,
ले चलना है जहाँ को संग में ||


यादें

एक याद को दफ़न करके, एक याद के साथ चला ,
यादों की टोली में,यादों की बारात चला  |
कहीं यादों में गुस्सा है, कहीं यादों में प्रेम भरा,
यादों की यह सिलसिले में, में यहाँ गुपचुप मौन परा ||

यादें भी अजीब हैं, ना जाने क़ब आ जाती  हैं,
काम कर रहा था मैं, अब  काम से मुझे बेह्कतीं हैं |
खुले दरवाजे जैसा मेरा यह बावले मन्न में,
कई भीनी हरकतओं की खेल, खेल  जाती हैं ||

मुस्कुरा उठता मैं खुद में, वोह छत को देखता हुआ,
अकेला हूँ यहाँ  अभी मगर , पर  यादों में संसार भरा |
न उमर की शीमा इन् यादों को, कहीं भी दौड़ी  चली जाती है,
बचपन से जवानी का  सफ़र, मिनटों में कर आती है ||

१४ फेब्रुअरी

प्यार का मुखोटा पेहने लो आ गया फिर से १४ फेब्रुअरी
पूछ रहा मुझसे बताओ क़ब तुम एक से दो होगे

यूँ तो रोज ही होता है प्यार करने का दिन
मोहब्बत जताने का , 'तुमसे प्यार है'- बताने का
पर साल में एक एक दिन प्यार का मसीहा बन कर आता हूँ
प्यार को एक नई शुरुआत देने के लिए, प्यार को एक  नया साल देने के लिए

जलाऊ फिर से धड़कती आग दिल में , अगर हो रही ठंडी चाहत
वोह दिल का बच्पना, वोह आँखों की सरारत
तुम उसकी धरकने फिर से बढाओ,
कोई न हो अगर , चलो जाओ, खोज कर लाओ

भूल जाओ वोह दिल की करवाहट, चोर्ट, दर्द
वोह क़ल था, आज नया दिन रात है
एक लम्बी साँस में , आपने दिल में उतार लो, महसूस करो मुझे
प्यार बनकर आया हूँ आज में , तो चलो न प्यार करें !