कोई खेले रंग की होली,
कोई खेलता खून की |
कहीं गोली तो कहीं योग है,
कहानी मेरे मात्रिभूम की ||
होलिका दहन तो चलती आई,
होली के सन्देश में |
भ्रस्टाचार को क़ब दहन करोगे,
बताओ भारत देश में ||
कोई फेहला रहा भारतीय रंग,
जाकर दूर प्रदेश में |
कोई थाली छलनी छेद कर रहा,
रहकर प्यारे देश में ||
कोई काली मिट्टी पोत रहा है,
खुशियाँ बिखेरते कर्मठ भारतीय वीर ||
भाँग जोश का बदन में चढ़ाव,
रंगों दुनिया को 'इंडियन' के रंग में |
है लगा धब्बा, मलमल उससे हटाओ,
ले चलना है जहाँ को संग में ||
कोई खेलता खून की |
कहीं गोली तो कहीं योग है,
कहानी मेरे मात्रिभूम की ||
होलिका दहन तो चलती आई,
होली के सन्देश में |
भ्रस्टाचार को क़ब दहन करोगे,
बताओ भारत देश में ||
कोई फेहला रहा भारतीय रंग,
जाकर दूर प्रदेश में |
कोई थाली छलनी छेद कर रहा,
रहकर प्यारे देश में ||
कोई काली मिट्टी पोत रहा है,
लेकर लालची लटकती लम्बी जीभ |
कहीं उड़ा रहे, सतरंगी गुलाल हवा में,खुशियाँ बिखेरते कर्मठ भारतीय वीर ||
भाँग जोश का बदन में चढ़ाव,
रंगों दुनिया को 'इंडियन' के रंग में |
है लगा धब्बा, मलमल उससे हटाओ,
ले चलना है जहाँ को संग में ||